प्रकृति : स्वागत नव वर्ष का

खड़ी सुबह है लिए रोशनी,
घास भी है अलसाई सी।
पडीं ओस की बूंदें धरा पर,
कि लागे जैसे हो मोती मूरत सी।
सूर्य की दृष्टि पड़ी भूमि पर,
चमक उठे कण-कण मोती से ।
ऋतु  शीत है ओस पड़ी है,
ठंड भी है अपने यौवन पर।
प्रकृति की छटा  दिखे निराली,
लगे आज नया जीवन है।।।

                         Praveen 🔯

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